चैतन्य शर्मा

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मैं चैतन्य एक बहुत अच्छा बच्चा हूँ | मैं 9 साल का हूँ | मुझे ड्राइंग-कलरिंग करना बहुत पसंद है | मैं क्लास IV में पढ़ता हूँ और माँ को कभी परेशान नहीं करता | मुझे डांस करना बेहद पसंद है | स्कूल में मुझे सब बहुत पसंद करते हैं | यह ब्लॉग 5 साल पहले मेरी माँ डॉ. मोनिका शर्मा ने बनाया था । अब मैं खुद अपने पोस्ट ब्लॉग पर शेयर करता हूँ । इस ब्लॉग पर मैं अपनी सारी बातें शेयर करूंगा |

Sunday, October 31, 2010

आया भूतों का त्योंहार.....!


 चारों  ओर भूतों , चुड़ेलों और  डरावने  चेहरों  का  डेरा ......  फिर चाहे घर हो या बाज़ार ..... स्कूल हो या मॉल......हर जगह एक ऐसे त्योंहार की धूम जिसमे डरने और डराने  का ही काम है | हेलोवीन एक ऐसा ही त्योंहार है जिसमे सब कुछ अजीबोगरीब सा  लगता  है | हर साल ३१ अत्तूबर को यह त्यौहार  मनाया जाता है जिसमे बच्चे और बड़े कई तरह के डरावने रूप धरते है | इतना ही घरों को भी डरावनी चीज़ों से सजाया जाता है  |  कद्दू  यानि की पम्पकिन का हेलोवीन के त्योंहार पर बड़ा महत्व होता है | घरो के दरवाज़े पर कद्दू को डरावने मुंह बनाकर सजाया जाता है | कई दिनों पहले से ही बाज़ार में  डरावनी  कॉस्ट्यूम्स बिकने लगती हैं | बाज़ारों की सजावट भी  भूतों और डरावने आइटम्स से की जाती है |  मैंने भी यह त्योंहार मनाया और खूब एन्जॉय भी किया | सन्डे का दिन था इसलिए मैं माँ और पापा के साथ  मॉल भी घूमने गया वहां सभी लोग डरावने कॉस्ट्यूम्स पहनकर घूम रहे थे | इन सबके बीच  अजब  अनोखे ड्रेस  पहने   मेरे नन्हे मुन्हे दोस्त सबसे प्यारे लग रहे थे  और हाथों में बास्केट लिए चोकलेट्स बटोर रहे थे |



नन्ही परी...जो तितली  बनी  


यह छोटू भी अच्छा लगा मुझे....


यह दोनों तो सच में डरावने लग रहे हैं.....



सो स्वीट ना.....

इसे देखकर तो मैं बहुत डर गया था......

एक तरफ  चुडेल और दूसरी तरफ परी......


 छोटू जी भी निकले हैं...भंवरा बनकर...!



कितनी प्यारी.....तितली



घर के दरवाज़े पर सजे भूत चुडेल और पम्पकिन  
 

बाज़ार में सजे डरावने आइटम्स...
 




और मैं हूँ   स्पाइडर.....!
    क्या आपको मुझसे डर लगा... ? मैंने स्पाइडर बनकर सबको डराने की कोशिश की लेकिन  कोई  डरा ही नहीं......सब मुझे सो क्यूट.......  सो क्यूट..... कह रहे थे :(     पता नहीं क्यों....?

Sunday, October 24, 2010

प्लीज़ यहाँ वोट करिए ना.....

Narayanan Krishnan

यह पोस्ट मैं आनंद राठौर अंकल की ब्लॉग से लेकर आया हूँ | मेरे ब्लॉग पर आने वाले सभी बड़े और मेरे जैसे नन्हे दोस्तों से मेरी रिक्वेस्ट है की प्लीज़ इस पोस्ट को पढ़े और  कृष्णन अंकल को वोट करें. आप सब मेरे  ब्लॉग पर प्यारे -प्यारे कमेन्ट लिखते हैं | प्लीज़  इस बार  थोड़ा  समय  निकालकर  नीचे दिए जा रहे लिंक पर जाकर अपना वोट ज़रूर दें और यह बताएं की हम सब हिन्दुस्तानियों को  उन पर गर्व है ...... हम उनके साथ हैं | जय हिंद

Vote and support Narayan Krishna
Dear Diary,
Mother Teresa said “we ourselves feel that what we are doing is just a drop in the ocean. But the ocean would be less because of the missing drop.”
Today I did my bit to contribute my drop of love, respect and support by voting a real hero NARAYANAN KRISHNAN. Read my post to know about him and please vote for him and support him to promote his cause.
If you had not heard of Narayanan Krishnan, as I had not, it is a collective failure. This is one of the most incredible stories of personal commitment.

Narayanan Krishnan, all of 29 years old now, does what he was professionally trained to do as a chef. Feed people. Only Krishnan does not do this in the swanky confines of a 5-star hotel. Every day, he wakes up at 4 am, cooks a simple hot meal and then, along with his team, loads it in a van and travels about 200 km feeding the homeless in Madurai, Tamil Nadu. Krishnan feeds, often with his hands, almost 400 destitute people every day. And for those who need it, he provides a free haircut too.

According to CNN, eight years ago, this award-winning chef with a five-star hotel chain was all set to go to Switzerland for a high-profile posting. On a visit to a Madurai temple, he came across a homeless, old man eating his own human waste. That stark sight changed Krishnan's life.
Much to the dismay of his parents, CNN says, Krishnan abandoned his career plans and decided to spend his life and his professional training in looking after those who could not care for themselves. He has provided more than 1.2 million hot meals through his nonprofit organization Akshaya Trust, and now hopes to extend this to shelter for the homeless too.

Krishnan is the only Indian in a list of 10 heroes that CNN has picked worldwide to honour. One of them will be chosen CNN Hero of the Year, selected by the public through an online poll. If many Indians get together to vote for this inspiring man, he can win by a long mile.
If Krishnan wins he will get $100,000 in addition to the $25,000 that he gets for being shortlisted for the Top 10. Akshaya Trust needs all the monetary support it can get to build on Krishnan's dream. Let's help him get there.
वोट करने  के लिए कृपया इस लिंक पर जाएँ 
 http://heroes.cnn.com/vote.aspx           
{The poll continues through November 18 at 6 a.m. ET.}
आप लोग मेरी बात मानेंगें ना....... वोट  करेंगें  ना .... प्लीज़   

Monday, October 18, 2010

मेरी खास वेजिटेबल क्लास...!



यह हैं देखो कद्दू जी .... इन्हें न समझो बुद्धूजी........

सब्जियां खाना हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है | ऐसा स्कूल में टीचर और घर में ममा हमेशा समझाती  हैं | लेकिन सब्जियां भी कितनी तरह की होती हैं..... अलग अलग रंगों वाली.... अलग अलग स्वाद वाली...... उन्हें पहचाना और उनके नाम याद रखना बड़ा मुश्किल होता है | टोमेटो पोटेटो तो मुझे पता है पर कई सारी सब्जियां मैं पहचान नहीं पा रहा था | तो ममा ने मेरी खास वेजिटेबल क्लास ही लगा दी | मुझे कुछ सब्जियां दिखाईं और उन सबके बारे में बताया ..... उनके नाम बताये ...... और बनाकर भी खिलाया..... बड़ी मजेदार रही मेरी यह खास क्लास.....!  




पत्ता गोभी..... सेहत की यह साथी सच्ची 
                                      खाओ पका कर या फिर कच्ची 



करेले...     भले ही कड़वा होता  स्वाद
                         हरदम दें सेहत का साथ



मुझे लगे यह चूहे जैसे
पूँछ पकड़ उठाया ऐसे


यह बड़ा ही प्यारा बैंगन
भरे हैं  सेहत-स्वाद के गुण




एक प्याज़ तो लम्बा पतला.... दूजा मोटा ताज़ा..... ?

Saturday, October 16, 2010

सुंदर नन्हें रामजी

मैया कौशल्या की गोदी में नन्हे रामजी.......



    सबको विजयादशमी  की हार्दिक शुभकामनायें....... बुराई पर अच्छाई 
                 की   जीत  के प्रतीक  इस सुंदर त्योंहार की सबको बधाई....

Saturday, October 9, 2010

हे माँ .... प्रणाम

सबसे पहले तो सबको नवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें....... इन दिनों चारों और नवरात्री उत्सव की धूम है | कहीं डांडिया रास तो कहीं पूजा और जागरण | सभी लोग माता की भक्ति में डूबे हैं | मैंने भी कल नवरात्री स्थापना पर माँ के दर्शन किये | नौ दिनों के लिए  मेरी ममा  भी व्रत कर रहीं हैं | इसलिए रोज सुबह घर में भी माता की पूजा होती है |   बड़ा ही अच्छा लग रहा है मुझे यह सब | हम सब अपनी माँ को कितना प्यार करते हैं, उनका मान करते हैं..... फिर दुर्गा माँ तो पूरे संसार की माँ हैं | आप भी देखिये कैलगिरी का वो मंदिर जहाँ मैंने भी माँ को नमन किया.... और उनका आशीर्वाद लिया |



ये  रहा.... मंदिर
 


कितनी सुंदर माँ की मूरत.....


मैं भी टीका लगा लेता हूँ.....



कई देवता विराजे हैं यहाँ......
 

हे माँ..... कृपा बनाये रखना.....!





अरे..... वो देखो गणपति बप्पा भी हैं.... !
 


इन चरणों से अच्छा क्या है...?
 

आप भी करें इनके दर्शन.....!



यूं सिन्दूर  से सजी माँ की मूरत.....
 

Monday, October 4, 2010

मेरी किताबें.....!
















किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं |  आजकल मैं कई तरह की किताबें पढ़ रहा हूँ | मेरी किताबें बहुत ही सुंदर और कलरफुल हैं | मैं लाइब्रेरी से भी किताबें लाता हूँ | आपको पता यह किताबों का एक बड़ा सा घर है जहाँ बहुत सारी किताबे रहती हैं |  कई लोग वहां बैठकर पढाई करते हैं और कई लोग किताबें घर लेकर जाते हैं | लाइब्रेरी में बिल्कुल भी शोर नहीं करते..... ऐसा मुझे माँ पापा ने समझाया है |  आज मैं भी लाइब्रेरी जा रहा हूँ...... अपने लिए किताबें लेने .......!

ये है मेरी लाइब्रेरी......


यहाँ तो बहुत किताबें है...... कहाँ से शुरू करूँ....?


कई  लोग सीरियस होकर पढ़ रहे हैं... मैं भी कोशिश करता हूँ.. !


हमम्म्म्म.....अब नज़र आ रहीं हैं मेरी पसंद की बुक्स.....!

मुझे ट्रेक्टर वाली बुक चाहिए........ ले लूँ .....?


कुछ और भी किताबें ढूंढता हूँ......आराम से बैठकर.....

अरे..... नहीं नहीं.... आराम से बैठना तो ऐसे होता है......!



यह दोनों अच्छी रहेंगी...... मज़ा आएगा पढ़ने में.....!


मैंने अपनी किताबें  सिलेक्ट कर ली हैं......


बास्केट भारी लग रही है....ज्यादा बुक्स तो नहीं ले लीं ? 


इतनी बुक्स ले तो लीं..... अब पढ़ना भी पड़ेगा......!
रंग बिरंगी प्यारी किताबें
देखो कितनी सारी किताबें

पतली लम्बी मोटी किताबें
 बड़ी अनमोल हैं छोटी किताबें

इनमें भरी हैं अच्छी बातें
हंसने रोने की सौगातें

कहीं कहानी कहीं कविता
कोई पन्ना ना है रीता

पुस्तकालय जब भी जाओ
इन मेहमानों को घर लाओ

अच्छी दोस्त, सच्ची साथी
किताबें जीवन को समझातीं
ये कविता मेरी माँ ने लिखी है........मुझे बहुत पसंद आई......!
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